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November, 2011 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सीरिया का काउंट डाउन

सीरिया में सत्ताधारियों और सुधारवादियों के बीच संघर्ष जिस हिंसात्मक दौर में पहुंच गया है, और जिस तरह से वैश्विक दबाव एक आकार लेता दिखाई दे रहा है, उससे तो यही लगता है कि राष्ट्रपति बशर अल असद की भी उलटी गिनती शुरू हो गई है। सीरियाई राष्ट्रपति इसके उलट यह धमकी देते दिख रहे हैं कि उनके देश में किसी भी प्रकार की पश्चिमी सैन्य कार्रवाई भूकंप ला सकती है। इसे क्या माना जाए, उनका आत्मविश्वास या फिर अतिवादिता अथवा नासमझी? सीरियाई राष्ट्रपति ने द संडे टेलीग्राफ को दिए साक्षात्कार में यह स्वीकार किया कि पश्चिमी सेनाओं का हम पर दवाब बढ़ रहा है, लेकिन किसी भी हस्तक्षेप से सीरिया एक और अफगानिस्तान में बदल सकता है। उनका कहना था कि इस क्षेत्र में सीरिया मुख्य केंद्र है, इसलिए यदि सीरिया में कोई समस्या होती है तो इसका असर पूरे इलाके पर पड़ेगा। उनका कहना था कि मिस्त्र और ट्यूनीशिया से सीरिया की स्थिति भिन्न है, इसकी राजनीति और इतिहास बिलकुल भिन्न हैं।
उनका यह बयान तब आया, जब सरकार विरोधी सीरियाइयों ने लीबिया की तरह सीरिया को नो फ्लाई जोन घोषित करने की मांग की और संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने सीरिया में दम…