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April, 2010 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

त्रासदी से प्रहसन कि ओर

कुछ अच्छा नहीं कर पा रहे हैं तो कुछ अच्छा करने के नाम हो जाये बस इतना ही इस देश के नुमाइंदों और ऊँचे ओहदों पर बैठे लोगों के लिए बहुत है । खतरनाक बात तो यह है कि हमारे ये तथाकथित निर्माता अपने विवेक और बुद्धि से काम नहीं कर पाते, नकलचीपण इनके पोर-पोर में घुस चुका है। अभी कुछ समय पहले देश कि एक शीर्षस्थ संस्था संघ लोक सेवा आयोग ने सिविल सेवा परीक्षा का पैटर्न परिवर्तित करने कि जिद कर ली और बदल भी दिया । अब जिसके हाथ में पाद्शाहत हो वे इस बात कि चिंता नहीं करते कि उन प्रतिभागियों का क्या होगा जो वर्षों से अपना भविष्य दांव पर लगाये हैं । अब सघ लोक सेवा आयोग के आदरणीय भद्र जन Aptitude टेस्ट के द्वारा नौकर्शाशी को ईमानदार और दक्ष बना लेंगे । मजे कि बात यह है कि हमारे प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह जी जब पहली बार प्रधान मंत्री बने थे तो इन्होने भी १०+२ के बाद ही सिविल के लिए प्रतिभागियों का कोई फ्रांसीसी पैटर्न खोज निकल था। उन्होंने भी इसी के जरिये ईमानदार नौकर मिलने का मार्ग मिल गया था । लेकिन उनकी आँखों ने वह नहीं देख जो उस समय तत्कालीन मुक्यमंत्री मुलायम सिंह ने किया था । पहले उन्होंने सबसे भ्…