शनिवार, 3 अप्रैल 2010

त्रासदी से प्रहसन कि ओर

कुछ अच्छा नहीं कर पा रहे हैं तो कुछ अच्छा करने के नाम हो जाये बस इतना ही इस देश के नुमाइंदों और ऊँचे ओहदों पर बैठे लोगों के लिए बहुत है । खतरनाक बात तो यह है कि हमारे ये तथाकथित निर्माता अपने विवेक और बुद्धि से काम नहीं कर पाते, नकलचीपण इनके पोर-पोर में घुस चुका है। अभी कुछ समय पहले देश कि एक शीर्षस्थ संस्था संघ लोक सेवा आयोग ने सिविल सेवा परीक्षा का पैटर्न परिवर्तित करने कि जिद कर ली और बदल भी दिया । अब जिसके हाथ में पाद्शाहत हो वे इस बात कि चिंता नहीं करते कि उन प्रतिभागियों का क्या होगा जो वर्षों से अपना भविष्य दांव पर लगाये हैं । अब सघ लोक सेवा आयोग के आदरणीय भद्र जन Aptitude टेस्ट के द्वारा नौकर्शाशी को ईमानदार और दक्ष बना लेंगे । मजे कि बात यह है कि हमारे प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह जी जब पहली बार प्रधान मंत्री बने थे तो इन्होने भी १०+२ के बाद ही सिविल के लिए प्रतिभागियों का कोई फ्रांसीसी पैटर्न खोज निकल था। उन्होंने भी इसी के जरिये ईमानदार नौकर मिलने का मार्ग मिल गया था । लेकिन उनकी आँखों ने वह नहीं देख जो उस समय तत्कालीन मुक्यमंत्री मुलायम सिंह ने किया था । पहले उन्होंने सबसे भ्रष्ट आई ए एस अखंड प्रताप सिंह को राज्य का प्रमुख सचिव बनाया, जब उन्हें कोर्ट से हटाया गया तो भ्रष्ट नंबर दो नीरजा यादव को राज्य का प्रमुख सचिव बना दिया गया । इस पर सुप्रीम कोर्ट कि टिपण्णी यह थी कि राज्य में और कोई ईमानदार अफसर नहीं रह गए । संघ लोक सेवा आयोग के आदरणीय भद्र सदस्य क्या यह बता सकते हैं कि वे Aptitude से उक्त स्थिति को सुधार लेंगे ?
दरअसल यह एक षड़यंत्र है जिसके तहत यह कोशिश कि जा रही है कि एक तो ग्रामीण माध्यम वर्ग के छात्रों को इस सेवा में जाने से रोक दिया जाये और दूसरा यह है कि अब बेहतर प्रशासक नहीं बल्कि बेहतर मनेजेर तैयार किये जाएँ जो बड़ी कंपनियों के साल्स मैनजरों की तरह यस सर ही यस सर करें । भद्र जनों आपकी जय हो आप सब देश का खूब कल्याण कर रहे हैं । ऐसे ही आप सब कल्याण करते रहे तो एक दिन इतिहास जरुर दोहराएगा और इस बार यह 'त्रासदी नहीं बल्कि मार्क्स के शब्दों में 'प्रहसन' होगा .